सोमवार, 5 मार्च 2012

हौसला...

रख हौसला के वो मंज़र भी आएगा…
प्यासे के पास चल के कभी तो दरिया आएगा...
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर...
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा...

4 टिप्‍पणियां:

  1. ओ महाराज क्या हाल हैं आपके, बड़े दिनों के बाद दर्शन दिए आशा करता हूँ आप सही होंगे!
    आपने जो ये छंद लिखा है, क्या कहूं इसके बारे में, दिल खुश हो गया पढ़ कर!
    मिलने का मज़ा थोड़ी सी बेवफाई और थोड़ी सी जुदाई के बाद ही आता है!
    आफरीन!

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  2. .


    दरिया आए न आए… हम आपके यहां चले आए :)
    अच्छा लिखा है


    मंगलकामनाएं !

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  3. रख हौसला के वो मंज़र भी आएगा…
    प्यासे के पास चल के कभी तो दरिया आएगा...
    sunder bhav
    rachana

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