सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

अधुरा ख्वाब....!!

 
 
अभी कल रात ही तो मिले थे तुमसे, कुछ नए रिश्तों की आगाज़ भी हुई. |
 
तन्हाई की इस शाम में, कुछ बाहार चाँद की हुई. | 
 
कितना कुछ कहते, कितना कुछ सुनते, मगर नजाने यह सुबह फिर कहाँ से हुई. ||

3 टिप्‍पणियां:

  1. अभी ....
    कल रात ही तो मिले थे
    कुछ नए रिश्तों की आगाज़ हुई...
    तन्हाई की इस शाम में
    चाँद की बहार हुई....
    कितना कुछ कहते
    कितना कुछ सुनते
    न जाने यह सुबह
    फिर कहाँ से हुई.....

    क्या बात है ....
    बहुत खूब ....

    (अगर इस तरह likhte तो खूबसूरती और badh जाती ....:)))

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  2. Namaskar!!
    Aapka blog bhi kabile tarif hai !!

    बिहारी का चौपाल !! blog hamara hai aapki ek Nazar chahunga !!

    www.ekbihari.co.cc

    Dhanyabad !!

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  3. कितना कुछ कहते, कितना कुछ सुनते, मगर नजाने यह सुबह फिर कहाँ से हुई...
    Waah...

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