मंगलवार, 12 जुलाई 2011

दीवाने! हम कैसे बन गए...!!!

तेरे सरगोशी में बैठे जमाने बीत गए...!
कितने बाहाने युही फसाने बन गए...!!
कभी मिलो, पास बैठो... तो समझो,
की तेरी चाह में दीवाने, हम कैसे बन गए...!!!



this is not over yet... but will take lot of time to complete... :(

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचना तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  2. कमाल करते हो विनीश बाबू,
    ये चार पन्क्तियाँ तो न जाने कहाँ कहाँ तक ले जायेगी आपकी सोच की पराकाष्ठा को!

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  3. chand sabdo me hi aapne puri kahani bayan ker di, sunder prastuti ke liye badhai

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