सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

स्याही से दिल बना, चिठियों में हाले-ऐ-ज़िगर बयाँ करना चाहे...
तेरी नशेमन आँखों में खो, जुल्फों में उलझना चाहे...

आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

एक गुलाब किताब में रख उसे हर वक़्त पड़ना चाहे...
तेरी मेहँदी देख, उसमे अपना अक्स ढूँढना चाहे...

आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

सबसे छुपा तेरा नाम अपने हाथों पे लिखना चाहे...
और कभी देर तलक तेरी तस्वीर निहारना चाहे...

आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

दोस्तों में तेरी बातें सुन, खुद पे इतराना चाहे...
और कभी महफ़िल में तेरी याद छुजाये, तो अपने को अकेला पाये...

आज फिर दिल सतरह......................

Vins :)

9 टिप्‍पणियां:

  1. OYE HOYE....
    main kya tareef karoon....
    aapki tareef diya dikhaane ke barabar hogi sooraj ko...

    आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

    kitni khoobsoorati se aapne vyakt ki hai apne dil ki baat....waakai mein....

    आज फिर दिल सतरह का होना चाहे!

    wah wah!

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  2. Thodi si meethi hai
    Zara si mirchi hai
    Sau gram zindagi yeh
    Sambhaal ke kharchi hai...

    In Short... आज फिर दिल सतरह का होना चाहे! :-)

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  3. तेरी मेहँदी देख, उसमे अपना अक्स ढूँढना चाहे.

    लाजवाब पंक्ति...बेहतरीन रचना ...बधाई..

    नीरज

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  4. દિવસો બદલાયા અને રાતો પણ બદલાઈ ગઈ,
    એક એક કરતા બધાની
    નજરો પણ બદલાઈ ગઈ,
    મળ્યા કેટલાય મોકા બદલાવાના પણ,
    તમને યાદ કરવાની આદત કદી
    ...ના બદલાઈ...

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  5. ye kavita padh ke to mujhe lagta hai aap 17 ke hi hain ... bahut achhe bhav liye rachna ...

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  6. Mein kavi Vinish Bharti, ( Dilliwale) ki kalpana ki daad deta hoon! kavita mein itni dum hai ki mujhe poore 30 saal rewind kara diya! Mujhe 1980 ki woh haseen lamhe yaad aa rahe hain , jab hum is kavita se 4 kadam aage the!!! God Bless Venkat

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  7. Wah Wah!!! Kya baath hai!!!

    A wonderful ode to the sweet seventeen!!

    Keep it flowing :-)

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